विश्वविद्यालय  केन्द्र
Tripura University

राज्य जैवप्रौद्योगिकी केन्द्र

केन्द्र का संक्षिप्त परिचय :

जैव प्रौद्योगिकी विभाग त्रिपुरा विश्वविद्यालय में अवस्थित राज्य जैव प्रौद्योगिकी केन्द्र (एसबीटी हब) की मूलभूत सुविधाएं जैव प्रौद्योगिकी विभाग, विज्ञान एवं तकनीकी विभाग, भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित है। विगत एक वर्ष के दौरान केन्द्र ने जैव प्रौद्योगिकी प्रविधि में 18 प्रशिक्षार्थियों को सफलता पूर्वक प्रशिक्षित किया है। केन्द्र वर्ष में एक कार्यशाला अवश्य करता है। केन्द्र में प्रथम चरण में कुछ आवश्यक खर्चीले उपकरण स्थापित कए गए हैं तथा दूसरे चरण के अंतर्गत आने वाले दिनों में अन्य आवश्यक उपकरण लगाए जाएंगे ताकि केन्द्र का शोध कार्य अबाध गति से संचालित हो सके। केन्द्र पूराना आईटी भवन के भूतल पर अवस्थित है। केन्द्र के पास दो प्रयोगशालाएं हैं जिसमें प्रयोगशाला-I विभिन्न उपकरणों तथा बैक्टिरिया, फंगस संपन्न है और प्रयोगशाला-II विभिन्न उपकरण तथा स्तनधारी कोशिका सुविधाओं से संपन्न है।

उद्देश्य :

कुछ छात्रों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ साथ आधुनिक उपकरण सुविधाओं में इस प्रकार से प्रशिक्षित किया गया है कि वे अल्प समय में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तैयार मानक के अनुरूप परिणाम दे सकें। विश्वविद्यालय तथा त्रिपुरा प्रदेश के अन्य भाग के शोधार्थी इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं, इसके लिए उन्हें केन्द्र प्रभारी वैज्ञानिक से पूर्व में अनुमति लेनी होगी। वर्ष में एक बार केन्द्र द्वारा कार्यशाला आयोजित की जाती है जिसमें केन्द्र महाविद्यालय शिक्षकों, शोधार्थियों तथा अन्य वैज्ञानिकों जो कि केन्द्र के प्रयोगशाला सुविधाओं का उपयोग करते हैं, उनको प्रशिक्षण प्रदान करता है।

स्थापना वर्ष :

2011

समन्वयक :

डॉ. देबाशीष मैती, सह प्राध्यापक

संचालित पाठ्यक्रम :

प्रत्येक छ: महीने में समाचार पत्र तथा विश्वविद्यालय वेबसाइट पर विज्ञापन के माध्यम से स्नातोकत्तर के 05 छात्र तथा 05 प्रशिक्षुओं (एमएस.सी. उत्तीर्ण) का तत्काल आरक्षण के द्वारा विभिन्न तकनीकों के प्रशिक्षण के लिए चुना जाता है, जिनमें पशु कोशिका संवर्धन, जीवाणु संवर्धन, एमआईसी निर्धारण, डीएनए तथा आरएनए आइसोलेशन, प्लाज्मिड आइसोलेसन, पीसीआर, आरटी-पीसीआर, इलेक्ट्रोपोरैशन, ट्रांसफेक्शन, वेस्टर्न ब्लॉट, इम्यूनोहिस्टोकैमिस्ट्री, इंजाइम कैनेटिक्स, एफ्लैटोक्सिन आइसोलेशन, बायोफर्टिलाइजर, मत्स्य जैव प्रौद्योगिकी, आधारीय जैवसूचना इत्यादि का प्रशिक्षण शामिल है।

प्रवेश क्षमता :

प्रत्येक छमाही में 10 अभ्यर्थी

कुल शोध परियोजना निधियन (पूर्ण एवं कार्याधीन):

304 लाख