विश्वविद्यालय  केन्द्र
Tripura University

विभाग का संक्षिप्त विवरण:

त्रिपुरा विश्वविद्यालय में यूजीसी की ग्यारहवी-योजना के दिशा-निर्देशों के अधीन सन् 2008 के अप्रैल माह में पर्याप्त मूलभूत सुविधाओं व आवश्यक लॉजिस्टिक्स के साथ सामाजिक बहिष्करण एवं समावेशी नीति अध्ययन केन्द्र स्थापित किया गया। सही मायने में भारतीय समाज को समतावादी बनाने हेतु उच्च शिक्षण संस्थाओं में सामाजिक बहिष्करण एवं समावेशी मुद्दों पर परिचर्चा की आवश्यकता है। प्राथमिक तौर पर बहिष्करण का अध्ययन व इसकी पहचान विश्वविद्यालय स्तर पर किया जाता है। विश्वविद्यालय समाज के लिए प्रकाश सदृश कार्य करता है। अतः यू. जी. सी. ने सामाजिक बहिष्करण के मुद्दों पर शोध में सहयोग देने का निर्णय लिया जो कि व्यवहारिक व नीति निर्धारण के महत्व का है। इस तरह के शोध का मुख्य केन्द्र समाज से आम तौर पर बहिष्कृत दलित, जनजातीय व धार्मिक रूप से अल्पसंख्यक लोग होंगे। इसी नेक कार्य को ध्यान में रखकर त्रिपुरा विश्वविद्यालय में शिक्षण सह शोध केन्द्र की स्थापना का विचार किया गया। दसवीं व ग्यारहवीं योजना के अधीन यूजीसी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप स्थापित 35 केन्द्रों में से सीएसएसईआईपी त्रिपुरा विश्वविद्यालय एक है।

केन्द्र के कार्य :

सीएसएसईआईपी, त्रिपुरा विश्वविद्यालय जिस प्रकार की बौद्धिक गतिविधियों में शामिल होगा वो अग्रलिखित हैं : अन्य विषयों के संकायों के संयुक्त तत्वावधान में एम.फिल. एवं पीएच.डी. का पर्यवेक्षण करना। समाजशास्त्र व मानविकी के सामाजिक बहिष्करण से संबंधित आंकड़े संग्रहित कर डाटा बेस तैयार करना। सरकारी एजेंसियों के माध्यम से निर्मित सामाजिक-आर्थिक आंकड़ों के आधार पर विश्लेषण। सामाजिक बहिष्करण विषय पर नियमित सम्मेलन, संगोष्ठी, परिचर्चा एवं कार्यशालाओं का आयोजन करना। संकायों एवं छात्रों द्वारा प्राप्त शोध-निष्कर्षों का प्रकाशन। प्रतिष्ठित विज्ञानों के द्वारा संबंधित विषय पर सार्वजनिक व्याख्यान आयोजित करना। अन्य विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के अध्येताओं खासकर युवा अध्येताओं से ‘विजिटिंग फैकल्टी’के रुप में आमंत्रित कर सक्रिय संपर्क स्थापित करना। सामाजिक बहिष्करण से संबंधित कार्य करने वाली नागरिक समाजिक संगठनों से संपर्क स्थापित करना। राजनीतिज्ञों, सांसदों, सरकारी कार्मिकों, व्यापार संघों एवं मीडिया शख्सियतों एवं नव पीढ़ियों के लिए लघु अवधि अभिमुखीकरण पाठ्यक्रम संचालित करना। एम. ए. एवं एम. फिल. स्तर पर इस पाठ्यक्रम को संचालित करवाना तथा समाजिक बहिष्करण अध्ययन में एम.ए. एवं एम. फिल. कार्यक्रम को पूर्ण रूपेण प्रारंभ करवाना।

स्थापना वर्ष :

2008

विभागाध्यक्ष:

डॉ. के एन.जेना, समन्वयक।

संचालित कार्यक्रम :

जनजाति एवं जातीय अध्ययन में स्नातकोत्तर उपाधिपत्र (पीजीडीटीईएस)

प्रवेश सामर्थ्य:

15 (पंद्रह)

नेट अर्ह्य कुल छात्र :

कोई नहीं

पी.एच.डी उपाधि से सम्मानित कुल छात्र :

कोई नहीं

कुल अनुदानित शोध परियोजनाएं (पूर्ण एवं अविरत ):

शोध गतिविधियां : शैक्षिक एवं शोध-कार्यवाही

  1. शैक्षिक शोध हेतु :
    • सामाजिक तौर पर बहिष्कृत समूह
    • विस्थापित समूह
    • सामाजिक विकास
    • समावेशी नीति/कार्रवाई
    • जनजाति एवं जातीय समूहों को अधिकारिता
    • सीमांत वर्ग
    • धर्म आधारित अल्पसंख्यक
    • दलित
    • अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अनुसूचित जाति
  2. शोध कार्यवाही हेतु :
    • आसन्न ग्रामों में विस्तार गतिविधियां

पूर्ण शोध

क्रम सं. शोध-विषय
1 रोल ऑफ एनटीएफपी इन फाइनेन्सियल इन्क्लूजन ऑफ ट्राइबल कम्युनिटी
2 इन्फॉर्मल सेक्टर एंड सोसली एक्सक्लूडेड पीपल: अ स्टडी ऑन बेदी वर्क्स ऑफ त्रिपुरा
3 एन इवेल्यूएशन स्टडी ऑन गवर्मेंट फंडेड प्रोजेक्ट फॉर द सोसली एक्सक्लूडेड पीपल
4 स्टैटस ऑफ माइनॉरिटी वुमन इन त्रिपुरा इन द पर्सपेक्टिव ऑफ ह्यूमन राइट
5 लोकेटिंग दलित मूवमेंट इन इंडिया : इन कंटेस्ट ऑफ एक्सक्लूसिव डेमोक्रेसी
6 सोसल एक्सक्लूजन एंड इनक्लूसिव पॉलिसी इन रिलेशन टू रेलिजिअस मैआनॉरिटीज ऑफ त्रिपुरा (मुस्लिम्स)
7 डिटेक्शन ऑफ नॉन-सिसमिक सरफेस जियोफिजिकल सिगनेचर्स एंड टेक्टोनिक जोन्स एट रेडियोमेट्रिक लेवल एंड अर्थक्वैक डिसैस्टर मैनेजमेंट प्लानिंग फॉर “सोसली एक्सक्लूडेड ग्रुप्स” इन द हिली विलेजेज ऑफ साउथ त्रिपुरा डिस्ट्रिक्ट
8 स्पैटिअल कैरेक्टर एनैलिसिस एट रेडियोमेट्रिक स्पेक्ट्रल रिजोल्यूशन (“8 बिट” डैटा सेट्स) बाई सॉफ्ट कंप्यूटिंग : अ जियोफिजिकल स्टडी फॉर इको-फ्रेंडली सस्टेनेबल प्लानिंग इन इंवायरमेंटली इनडेंजर्ड रूरल एरियाज अराउंड रुद्रसागर लेक फॉर “सोसली एक्सक्लूडेड ग्रुप”
9 इकोनॉमिक इनक्लूजन ऑफ त्रिपुरा ट्राइव इन टू द मेनस्ट्रीम
10 सोसल एक्सक्लूजन : अ थ्योरिटिकल एप्रोच

कार्याधीन शोध :

क्रम सं.. शोध-विषय
1 इम्पैक्ट ऑफ मदरसा फॉर सोसल इनक्लूजन ऑफ मुस्लिम्स इन त्रिपुरा
2 कंपरैटिव स्टडी ऑन सोसली एक्सक्लूडेड पीपल ऑफ इंडिया एंड बांग्लादेश
3 सोसियो-इकोनॉमिक कंडीशन ऑफ हरिजन इन त्रिपुरा
4 सोसियो-इकोनॉमिक कंडीशन ऑफ कारबॉन्ग ट्राइबल इन त्रिपुरा
5 लाइफ एंड वर्क ऑफ ठाकुर प्रभात चंद्र रॉय – अ सोसियो पोलिटिकल एंड लिटरेरी स्टडी
6 दलित एंड सोसल एक्सक्लूजन : अ स्टडी ऑन एसटी, एससी, ओबीसी, माइनॉरिटीज ऑफ त्रिपुरा

संप्रति संकाय सदस्य :

नामयोग्यतापदविशिष्टता
डा. के. एन. जेना एमए., पीएचडी. प्राध्यापक भूमंडलीकरण एवं विकास अध्‍ययन
डा. राजेश चटर्जी ग्रामीण विकास में एमए., पीएचडी., प्रवक्ता सह सहायक निदेशक सामाजिक क्षेत्र एवं ग्रामीण विस्‍तार
डा. नानीगोपाल देबनाथ एमएससी. (अर्थशास्त्र), पीएचडी प्रवक्ता सह सहायक निदेशक जनसंख्‍या अध्‍ययन मानव विकास जनजातीय अध्‍ययन

संचालित विभिन्न कार्यक्रमों का पाठयक्रम :

  • स्नातकोत्तर :: लागू नहीं
  • अवरस्नातक : : लागू नहीं
  • स्नातकोत्तर उपाधिपत्र : : डाउनलोड करें
  • पी.एच.डी. पाठयक्रम कार्य : : लागू नहीं
  • शोध-पात्रता परीक्षा (आरईटी) : लागू नहीं

आयोजित संगोष्ठी /सम्मेलन/ कार्यशाला / पुनश्चर्या/प्रशिक्षण आदि :

  1. “जनजातीय आजीविका : चुनौती एवं संभावनाएं” पर राष्ट्रीय संगोष्ठी, 24 - 25 जून, 2013 (एमआरएमडी के संयुक्त तत्वावधान में)
  2. समाजशास्त्र में शोध प्रविधि पर 10 दिवसीय आईसीएसएसआर कार्यशाला, 20 – 29 नवम्बर, 2012
  3. “रिसर्च इन सोसल साइंस टूवर्ड्स सोसल इन्क्लूजन” पर आईसीएसएसआर-एनईआरसी की विशेष व्याख्यान सह कार्यशाला, 4 नवंबर, 2011
  4. वर्कशॉप कम ट्रेनिंग प्रोग्राम ऑन इंपैक्ट स्टडी ऑन हेल्थ रिलेटेड आईईसी एक्टिविटीज, 18-19 नवंबर, 2011
  5. "रेलिजियो-कल्चरल डायनॉमिक्स एंड सोसल एक्सक्लूजन एंड इन्क्लूजन इन इंडिया " पर राष्ट्रीय संगोष्ठी, 25 अप्रैल
  6. प्रथम राज्य स्तरीय कार्यशाला जिसमें त्रिपुरा विश्वविद्यालय और संबद्ध महाविद्यालयों के के संकाय सदस्यों को शामिल किया गया। इस कार्यशाला में प्रो. राजू रानी धमेला ने अध्यक्षतदा की तथा प्रो. पवित्र सरकार, एक्स-वाइस-चांसलर, रवीन्द्र भारती यूनिवर्सिटी, कोलकाता ने भी संबोधित किया।
  7. केन्द्र में प्रो. प्रो. सुखदेव थोराट, ऑनरेबल चेयरमैन, यूजीसी, नई दिल्ली 14 फरवरी, 2009, को केन्द्र के नवीय स्थल के उद्घाटन पर यहाँ का भ्रमण किया।
  8. केन्द्र ने अपनी दूसरी कार्यशाला तथा सोसल एक्सक्लूजन एंड इनक्लूजन पॉलिसी पर सेंसीटाइजेशन कार्यक्रम 17 फरवरी, 2009 को आयोजित किया। डॉ. नरेन्द्र कुमार, सह प्राध्यापक प्रो., सेंटर फॉर माइनोरिटी एंड दलित स्टडीज, जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी, न्यू दिल्ली मुख्य वक्ता रहे।
  9. केन्द्र ने डॉ. बी. आर. अंबेदकर जयंती का आयोजन किया जिसमें एक कार्यशाला ‘द फाइल एंड फिलॉसोफी ऑफ अंबेदकर’ 14 मई, 2009, त्रिपुरा विश्वविद्यालय के छात्रों एवं संकाय सदस्यों के साथ आयोजित की।
  10. “दलित्स इन इंडिया एंड सोसल एक्सक्लूजन”, पर केन्द्र ने एक सूक्ष्म कार्यशाला आयोजित की जिसमें श्रीमती दीपमाला, वरिष्ठ शोधार्थी, जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली ने विषय संबंधी व्याख्यान दिया।
  11. केन्द्र ने विस्तार कार्यक्रम के अन्तर्गत आईसीएआर, अगरतला का संस्थागत भ्रमण 9 मई, 2009 को ग्रामीण प्रबंधन एवं विकास के के छात्रों एवं संकाय सदस्यों के साथ किया।
  12. केन्द्र ने विस्तार कार्यक्रम के अंतर्गत त्रिपुरा विश्वविद्यालय के निकटवर्ती ग्रामों में स्वयं सहायता समूह के निर्माण में लगा हुआ है। खास मधुपुर ग्राम पंचायत को गरीबी रेखा के नीचे को लोगों के लिए कैपेसिटी बिल्डिंग कार्यक्रम के तहत एडॉप्ट करने की प्रक्रिया में है।
  13. केन्द्र ने “पीआरए फॉर सोसल एक्सक्लूजन” पर समाजशास्त्र व मानविकी के छात्रों की सहभागिता से सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया।

सम्पर्क के लिए पता:

सामाजिक बहिष्करण एवं समावेशी नीति अध्ययन केन्द्र
त्रिपुरा विश्वविद्यालय, पुस्तकालय भवन, सूर्यमणिनगर, त्रिपुरा

प्रयोगशाला सुविधाएँ :

उपलब्ध मुख्य उपकरण (प्रत्येक लाख में) सात कंप्यूटरों के साथ पूर्ण कंप्यूटरीकृत प्रयोगशाला

शोध-समूहों का विवरणः

--

संयुक्त तत्वावधान :

--

अन्य जानकारियाँ (यदि कोई है):

--

डाटा बैंक एवं पुरालेख :

  1. राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय परिपेक्ष्य में अनुसूचित जाति/जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित लोगों की सामाजिक-आर्थिक परिस्थिति से संबंधित महत्त्वपूर्ण जानकारियों के संग्रहण हेतु एक डाटा बैंक की स्थापना की गई है।

प्रलेखन एवं प्रकाशन प्रकोष्ठ :

  1. सभी प्रकार के प्रकाशकीय गतिविधियों को संचालित करने के लिए केन्द्र में प्रलेखन एवं प्रकाशन प्रकोष्ठ की स्थापना की गई है।