विश्वविद्यालय  केन्द्र
Tripura University

विभाग का संक्षिप्त परिचय

त्रिपुरा विश्वविद्यालय की कार्यकारी समिति के अनुमोदन से ग्रामीण प्रबंधन एवं विकास विभाग के साथ ग्रामीण अध्ययन केन्द्र की स्थापना की गई।

केन्द्र के महत्वपूर्ण क्षेत्र :

  1. ग्रामीण प्रलेखीकरण
  2. ग्रामीण शोध
  3. ग्रामीण प्रकाशन
  4. ग्रामीण विस्तार

स्थापना वर्ष:

2006

विभागाध्यक्ष:

डॉ. जयंत चौधरी।

संचालित पाठयक्रम :

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प्रवेश क्षमता :

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नेट अर्ह्य कुल छात्र

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पीएच.डी. उपाधि प्राप्त कुल छात्र :

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कुल शोध परियोजना अनुदान (पूर्ण एवं अविरत)

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संप्रति विभाग के संकाय की स्थिति :

नाम अहर्तापदविशिष्टता
डॉ. जयंत चौधरी
पीएच.डी. (ग्रामीण विकास)  समन्वयक पीएच.डी. (ग्रामीण विकास)

संचालित विभिन्न पाठयक्रमों के पाठ्यक्रम:

  • स्नातकोत्तर : डाउनलोड करें
  • अवरस्नातक : डाउनलोड करें
  • स्नातकोत्तर उपाधिपत्र: डाउनलोड करें
  • पी.एच.डी. पाठयक्रम कार्य : डाउनलोड करें
  • अनुसंधान पात्रता परीक्षा (आरईटी) : डाउनलोड करें
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सम्पर्क के लिए पता

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प्रयोगशाला सुविधाएँ :

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अनुसंधान समूह का विवरणः

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सहयोग :

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अन्य जानकारी (यदि कोई हों) :

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अब तक गतिविधियां :

ग्रामीण प्रलेखीकरण :

  • पुस्तक क्रय व पत्रिकाओं की सदस्यता : ग्रामीण अध्ययन केन्द्र (सीआरएस) ने ग्रामीण विकास से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर आधारित पुस्तकों का क्रय कर लिया है। पुस्तकों के क्रय के अतिरिक्त केन्द्र ग्रामीण विकास से संबंधित राष्ट्रीय व अतंरराष्ट्रीय पत्रिकाएं भी मँगाता है। केन्द्र में उपलब्ध इन सुविधाओं से न केवल छात्र बल्कि एमआरएमडी के संकाय भी लाभान्वित हो रहे हैं।
  • सफल सुक्ष्म उद्यमियों का प्रलेखीकरण : ग्रामीण अध्ययन केन्द्र (सीआरएस) ने राज्य के 60 से अधिक सूक्ष्म-उद्यमों का प्रलेखीकरण किया

ग्रामीण शोध :

  • ‘प्रथम’ हेतु वार्षिक शिक्षा सर्वेक्षण प्रतिवेदन, 2006 : यह अध्ययन त्रिपुरा के 120 गावों के 2400 घरों पर किया गया।
  • ट्राइबैक, त्रिपुरा के लिए बांस कारीगरों पर बेसलाइन सर्वेक्षण
  • त्रिपुरा विश्वविद्यालय के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय में काउंसिलिंग पद्धति : अध्ययन दूरस्थ शिक्षा निदेशालय, त्रिपुरा विश्वविद्यालय द्वारा वित्त पोषित है।
  • एसएचजी के माध्यम से महिला सशक्तिकरण : त्रिपुरा के डुकली विकास खंड का पायलट अध्ययन : यह अध्ययन महिला अध्ययन प्रकोष्ठ, त्रिपुरा विश्वविद्यालय के सहयोग से किया गया।

ग्रामीण प्रकाशनः

  • ग्राम दर्शन : ग्रामीण अध्ययन केन्द्र ने ‘ग्राम दर्शन’ समाचार पत्र के प्रथम अंक का प्रकाशन किया जो कि त्रिपुरा विश्वविद्यालय में अपने प्रकार का प्रथम समाचारपत्र है। ‘ग्राम दर्शन’ केन्द्र के विभिन्न गतिविधियों को प्रलेखित तथा ग्रामीण विकास के विभिन्न आयामों को चित्रित करता है। विभिन्न विभागों के संकायों व ग्रामीण प्रबंधन एवं विकास पाठ्यक्रम के छात्रों की उपस्थिति में त्रिपुरा विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति, प्रो. अरुणोदय साहा ने इसका उद्घाटन किया था।
  • अमराओ पारी : :सफल एसएचजी उद्यमियों पर बांग्ला में एक पुस्तक प्रकाशित हुई जिसे विभिन्न पंचायतों एवं एसएचजी में वितरित किया गया। सूचनात्मक प्रलेखन की यह पुस्तक छात्रों द्वारा लिखी गई जिसे डॉ. जयंत चौधरी ने संपादित किया।

ग्रामीण प्रसार :

  • एमआरएमडी छात्रों हेतु ‘एक्सपोजर विजिट’ : ग्रामीण अध्ययन केन्द्र द्वारा त्रिपुरा विश्वविद्यालय के ग्रामीण प्रबंधन एवं विकास कार्यक्रम के स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के छात्रों के लिए एक ‘एक्सपोजर विजिट’ का आयोजन किया गया। इस एक दिवसीय कार्यक्रम में संकायों के साथ कुल 62 छात्रों (पार्ट एक एवं दो) ने सहभागिता की। इसमें छात्रों को डॉन बॉस्को (त्रिपुरा में कार्यरत गैर सरकारी संस्था) तथा सिपाहीजला वन्य जीव अभ्यारण्य, वन विभाग, त्रिपुरा सरकार की विभिन्न परियोजनाओं से जुड़े व्यक्तियों से मिलने का अवसर मिला। छात्रों ने इस कार्यक्रम का भरपूर आनंद लिया तथा इससे उन्हें ग्रामीण विकास संबंधी विभिन्न पहलुओं का व्यवहारिक ज्ञान प्राप्त हुआ।
  • राज्य-स्तरीय कार्यशाला : ग्रामीण अध्ययन केन्द्र द्वारा ‘ग्रामीण महिलाओं एवं बच्चों के विकास : चुनौतियाँ एवं संभावनाएँ’ विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का दिनांक 17-18 अप्रैल, 2008 को आयोजित किया गया । कार्यक्रम का उद्घाटन माननीय मंत्री श्रीमती बिजिता नाथ, एसडब्ल्यू एवं एसई विभाग, त्रिपुरा सरकार ने किया। कार्यशाला काफी सफल रही। राज्य के विभिन्न क्षेत्रों के प्रख्यात व्यक्तियों द्वारा कुल 16 पत्र प्रस्तुत किए गए। प्रो. इशिता मुखोपाध्याय, निदेशक, महिला अध्ययन केन्द्र, कलकत्ता विश्वविद्यालय की उपस्थिति ने कार्यशाला की महत्ता बढ़ा दी, जिन्होंने ‘कामकाज में महिलाओं की सहभागिता एवं ग्रामीण विकास’ पर अपने महत्त्वपूर्ण विचार वक्तव्य भी दिए। कार्यशाला का अंतिम सत्र उस वक्त और रोचक हो गया जब विभिन्न विभागों के छात्रों को अपना पत्र प्रस्तुत करने का अवसर मिला तथा उनमें उत्तम पत्र प्रस्तुति हेतु पुरस्कार के लिए प्रतिस्पर्धा हुई। माननीय कुलपति प्रो. अरुणोदय साहा के सम्भाषण ने कार्यशाला को और समृद्ध बना दिया। कार्यशाला के समापन सत्र के दौरान प्रो. अपूर्व मुखोपाध्याय, फेलो, नेताजी सुभाष इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट स्टडीज को अपने बीच पाकर ग्रामीण अध्ययन केन्द्र गौरवान्वित महसूस किया, जिनसे केन्द्र ने पत्र प्रस्तुत करने वालों को प्रमाणपत्र प्रदान करने का अनुरोध
  • सूक्ष्म कार्यशाला : केन्द्र ने ग्रामीण प्रबंधन एवं विकास विभाग के छात्रों के लिए 15 सूक्ष्म कार्यशालाओं का आयोजन कर चुका है। इस तरह के कार्यक्रमों को प्रारंभ करने का उद्देश्य- छात्रों एवं प्रैक्टिसनरों के मध्य संवाद स्थापित करना तथा अन्य संस्थानों/संगठनों के साथ विभाग का नेटवर्क का स्थापित करना है। इस तरह के कार्यक्रमों में त्रिपुरा सरकार के विभिन्न विभागों के गणमान्य व्यक्तियों, त्रिपुरा एवं बाहर के विभिन्न संस्थानों तथा विदेशी संस्थाओं ने सहभागिता की तथा छात्रों से संवाद स्थापित हुआ।
  • गैर सरकारी संगठन(एनजीओ) प्रबंधन प्रशिक्षण : केन्द्र द्वारा एनजीओ मैनेजमेंट पर 1-5 दिसंबर, 2009 के बीच प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के राज्य के विभिन्न एनजीओ के 26 सहभागियों को लाभ हुआ। प्रो. एन. उपाध्याय, पूर्व निदेशक, राष्ट्रीय ग्रामीण विकास संस्थान (एनआईआरडी-एनईआरसी) ने अन्य गणमान्य व्यक्तियों के साथ बतौर अतिथि वक्ता सहभागिता की।
  • बांस आधारित आजीविका पर कौशल विकास : केन्द्र ने बांस आधारित विभिन्न उत्पादों के लिए 20 ग्रामीण महिलाओं के लिए दिनांक 23 नवंबर से 04 दिसंबर, 2009 के दौरान 10 दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। प्रशिक्षण के बाद उनकी गतिविधियों को जारी रखने तथा पारिवारिक आय बढ़ाने हेतु उन्हें विभिन्न उपकरण प्रदान किए गए। बाजार और वित्तीय संस्थाओं के साथ संयोजन भी स्थापित किया गया।