प्रशासन
कुलपति का संदेश

कुलपति का संदेश


त्रिपुरा विश्वविद्यालय की दृष्टि उत्कृष्टता का अनुसरण है। जैसा कि गुरुदेव रबीन्द्रनाथ टैगोर ने कहा था “शिक्षा बहुमूल्य रत्न है और नैतिकता उसका प्रभामंडल।” इसी धारणा को ध्येय बनाकर त्रिपुरा विश्वविद्यालय उत्कृष्टता की ओर अपनी यात्रा में आगे बढ़ रहा है। यह स्पष्ट है कि उच्च शिक्षा में उत्कृष्टता लाना सर्वोच्च जिम्मेदारी है, विशेष रूप से क्षेत्रीय स्तर पर विश्वविद्यालय शिक्षा के क्षेत्र में तथापि इसमें कई चुनौतियाँ एवं अवसर हैं।

त्रिपुरा विश्वविद्यालय की स्थापना 11987 में हुई तथा 2007 में इसे केन्द्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिला। अपनी 31 वर्षीय यात्रा में विश्वविद्यालय ने पूर्वोत्तर भारत के उच्च श्रेणी के शिक्षा संस्थान के रूप में प्रतिष्ठा हासिल की है। त्रिपुरा में उच्च शिक्षा क्षैतिज एवं ऊर्ध्व दोनो दिशा में विकसित हो रही है। उच्च शिक्षा में समाज के शैक्षिक वर्ग की बड़ी संख्या एवं अधिक प्रभावी सहभागिता की आवश्यकता है। त्रिपुरा में साक्षरता दर 98% से अधिक है जो कि संभवत: भारत में सर्वोच्च है। तथापि उच्च शिक्षा में छात्रों की सहभागिता संतोषजनक नहीं है। अत: त्रिपुरा विश्वविद्यालय में छात्रों की सकल नामांकन दर में सुधार एवं वृद्धि होनी चाहिए। राज्य के उच्च शिक्षा में समग्र परिवर्तन लाने के क्रम में त्रिपुरा विश्वविद्यालय कठिन प्रयत्न कर रहा है।

त्रिपुरा विश्वविद्यालय के पास 45 से अधिक विभाग एवं दूरस्थ शिक्षा केन्द्र हैं। इसके अलावा त्रिपुरा विश्वविद्यालय राष्ट्रीय सेवा योजना के द्वारा विभिन्न प्रयोग कर रहा है और इसके अंतर्गत विश्वविद्यालय को निकटवर्ती ग्रामीण समाज से जोड़ने हेतु पाँच ग्रामों को अंगीकृत किया गया है। ज्ञान आयोग द्वारा ग्रंथागारों को ज्ञान संसाधन केन्द्र के रूप में बताया गया है। यह जानना जरूरी है कि त्रिपुरा विश्वविद्यालय का ग्रंथागार अत्यंत विकसित है। इसमें पुस्तकों एवं ई-पुस्तकों का प्रचुर संग्रह है। ज्ञान आयोग ने ग्रंथागारों एवं प्रयोगशालाओं को जन-संस्थानों के रूप में रूपांतरित करने की अनुशंसा की है। त्रिपुरा विश्वविद्यालय की प्रयोगशाला सुविधायें अनुपम एवं विशिष्ट हैं। त्रिपुरा विश्वविद्यालय के भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, प्राणी विज्ञान एवं जीव विज्ञानों के शोधार्थियों द्वारा विभिन्न शोध परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के साथ साथ अभियांत्रिकी के क्षेत्र में विशिष्ट उपलब्धियाँ प्राप्त की हैं।

पिछले वर्षों में त्रिपुरा विश्वविद्यालय ने शिक्षा विभाग की स्थापना की है तथा इनका समेकित बी.एड. पाठ्यक्रम भी है। समाज विज्ञान के क्षेत्र में विभिन्न समेकित पाठ्यक्रमों के साथ बीए एवं एमए कराने का प्रयोग अत्यंत सफल है। त्रिपुरा विश्वविद्यालय और अधिक व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को स्थापित करने की योजना बना रहा है। ये पाठ्यक्रम विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की अनुशंसा के बाद अगले शैक्षणिक वर्ष से आरंभ किये जायेंगे। इन पाठ्यक्रमों में कुछ प्रमुख स्कूल ऑफ लिबरल आर्ट्स, समाज कार्य में स्नातकोत्तर के साथ साथ पुरातत्व विज्ञान/पर्यटन प्रशासन एवं सामाजिक अध्ययन के अन्य पाठ्यक्रमों में स्नातकोत्तर हैं।

त्रिपुरा विश्वविद्यालय ने नीति अध्ययन केन्द्र, योग अध्ययन केन्द्र, की स्थापना का लक्ष्य भी रखा है साथ साथ नैनोटेक्नॉलॉजी एवं बॉयोटेक्नॉलॉजी के नये पाठ्यक्रम में स्थापित करने हेतु कार्य कर रहा है। इन नये पाठ्यक्रमों के सूत्रपात को ध्यान में रखने के साथ हम फिल्म एवं टेलिविजन निर्माण तथा रबर प्रौद्योगिकी में बी.वोक. पाठ्यक्रम भी संचालित कर रहे हैं। हम मशरूम संवर्धन एवं उद्यानिकी विकास, खाद्य प्रसंस्करण इत्यादि में नये पाठ्यक्रम आरंभ की भी योजना बना रहे हैं। ये पाठ्यक्रम भविष्य में आगे बढ़ने हेतु साहसी कदम होंगे। इन प्रयासों को देखते हुए मैं सबी छात्र शिक्षार्थियों एवं सामुदायिक सहभागियों से त्रिपुरा में शिक्षा के द्वारा संपूर्ण परिवर्तन की प्रक्रिया में भागीदारी हेतु आग्रह करता हूँ। त्रिपुरा विश्वविद्यालय को पूर्वोत्तर में उच्च शिक्षा का संरक्षक तथा शिक्षा प्रकाश विस्तारक बनाने के क्रम में में आश्वस्त हूँ कि त्रिपुरा विश्वविद्यालय आने वाले समय में एक आदर्श विश्वविद्यालय के रूप में आने वाले दशकों में विकसित हो सकेगा।

प्रो. वि. ल. धारूरकर कुलपति त्रिपुरा विश्वविद्यालय