प्रोफ़ाइल
Tripura University

स्थापना :

छात्र समुदाय की लम्बे समय से माँग व बड़ी संख्या में लोगों की आशाओं तथा शिक्षा की वर्तमान एवं भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने वर्ष 1987 में विधानसभा में त्रिपुरा विश्वविद्यालय अधिनियम पारित कराने का निर्णय लिया और अंतत: राज्य में प्रथम विश्वविद्यालय 2 अक्टूबर 1987 को ’राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के जन्म दिवस’ पर अस्तित्व में आया। इस प्रकार त्रिपुरा के हजारों लोगों का स्वप्न साकार हुआ तथा इसके परिणामस्वरूप त्रिपुरा विश्वविद्यालय में कलकत्ता विश्वविद्यालय स्नातकोत्तर केन्द्र (सीयूपीजीसी) के विलय तथा सूर्यमणिनगर के नए स्थल परिसर में कॉलेज टीला परिसर को स्थानांतरित कर दिया गया और त्रिपुरा के सभी महाविद्यालय इस विश्वविद्यालय से सम्बद्ध हो गये।

उद्देश्य :

त्रिपुरा विश्वविद्यालय अधिनियम का उद्देश्य प्रदेश में सिर्फ समकालीन समाज से संबंधित “निर्देशात्मक व अनुसंधानात्मक सुविधायें उपलब्ध कराकर ज्ञान का प्रसार एवं विकास” करना भर न होकर “उत्कृष्टता की खोज” ध्येय वाक्य के साथ जनजातीय जीवन तथा संस्कृति के विशेष अध्ययन प्रबंध तथा व्यावसायिक विषयों को आरंभ करना था ताकि छात्रों को रोजगार संबंधी सुविधायें प्राप्त हो सकें। विश्वविद्यालय में विशिष्ट डिप्लोमा, डिग्री और कुछ विषयों में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम प्रारंभ करने हेतु इस अधिनियम में विशेष प्रावधान किए गए। इस प्रकार अधिनियम की भावनाओं के अनुरूप त्रिपुरा विश्वविद्यालय ने अपना सफर वर्ष 1987 से प्रारम्भ किया।

संप्रति :

विश्वविद्यालय अब सूर्यमणिनगर के अपने परिसर में स्थापित हो चुका है। 35 स्नातकोत्तर विभागों के शैक्षिक कार्यक्रमों, निदेशालयों, केन्द्रों तथा प्रशासनिक विभागों इत्यादि के अतिरिक्त, राज्य के 46 संबद्ध महाविद्यालयों के पाठ्यक्रम निर्माण, शैक्षिक कार्यक्रमों के पर्यवेक्षण, परीक्षाओं के संचालन इत्यादि में विश्वविद्यालय शैक्षिक सहयोग भी प्रदान करता है तथा प्रारम्भ के विघ्न-बाधाओं के बावजूद विश्वविद्यालय राज्य सरकार, यू.जी.सी., एन. ई. सी. तथा योजना आयोग व कई अन्य संगठनों प्राधिकारियों के साथ मिलकर आसन्न कठिनाइयों से उबरने की कोशिश कर रहा है। विभिन्न आर्थिक अवरोधों के बावजूद राज्य सरकार और विश्वविद्यालय के मध्य अत्यंत सौहाद्रपूर्ण व औपचारिक संबंध है तथा राज्य की समृद्धि व विकास के लिए विशेष तौर पर पिछड़े तथा जनजातीय लोगों की उन्नति हेतु दोनों एक-दूसरे को नये-नये विचारों से प्रोत्साहित करते हैं। संसद द्वारा त्रिपुरा विश्वविद्यालय को ‘त्रिपुरा विश्वविद्यालय अधिनियम 2006’ के अंतर्गत 2 जुलाई, 2007 को केन्द्रीय विश्वविद्यालय में परिवर्तित कर दिया है।